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उड़नछू(२)…

हसरत तो हमे भी थी मोहब्बतें इश्क की,
पर  कम्बख्त  ने  दिल  इस  कदर  तोड़ा,

फिर किसी से जुड़ने की नाम ही नहीं ली।

                          ~ANKIT VERMA

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गुफ्तगूं (2)…

चाहते इश्क है, इसे फरियाद मत समझो
ये जो हम तुम पेमरते हैं, इसे मजाक मत समझो

यूं तन्हाइयों को भी जो हंसकर झेल जाते हैं

ये मोहब्बत है मेरी, इसे बकवास मत समझो।

                                   ~ANKIT VERMA

सुहाना पल….

ए जिन्दगी तू भी भूल जा,
सब भूल गए अब उस पल को,

वो पल जो हम साथ बिताए थे,

जिस पल में हसें और गाए थे,

जिस पल में होती थी ठिठोलियाँ,

कहीं चुगलियां तो कहीं उगलियाँ,

कहीं खाती पीती मस्ती थी,

उसमे भी इक कस्ती थी,

हम कालेज में जब जाते थे,

वो दिन जो साथ बिताते थे,

कभी पढ़ते थे कभी लड़ते थे,

कभी यूं ही बातों-बातों में,

हम कुछ बड़ी कल्पना करते थे,

कुछ खट्टे मीठे प्रश्नों को हम,

सर से पूछा करते थे,

तब कभी नहीं हम सोचे थे,

इक दिन ऐसा भी आएगा,

जब छूट सब कुछ जाएगा,

हम दूर कहीं खो सा जाएंगे,

शायद फिर मिल भी न पाएंगे,

खुद को यही दिलासा दिलायेंगे,

ए जिन्दगी तू भी भूल जा,

सब भूल गए शायद उस पल को।

बचपन और स्कूल की मस्ती और दोस्ती को जीवनपर्यन्त कभी भुलाया नहीं जा सकता है, ये वो अनमोल समय या ईश्वर द्वारा दिया गया उपहार है जिसकी यादें हमेशा हमारे अंदर इक अजीब सी खुशी उत्पन्न करती हैं जिसका वर्णन हम शब्दों में नहीं कर सकते।

Love you all of you my friends who gave me the happiest childhood and college times. Miss you yr……

                                        ~ ANKIT VERMA

ए जिन्दगी थम जा जरा….

ए जिन्दगी थम जा जरा,मेरी उनसे मुलाकात हो गई
जो सोच रहा था मैं अब तक,अब वही बात हो गई

यूं   आँखें   मिली   और   शुरुआत   हो   गई

फिर   वही   हमारी   मुहब्बत   की   कहानी

अब इसी प्यार के सागर में हमें डूब जाने दे

ए जिन्दगी थम जा जरा….

उनकी   नीदों   मे , उनकी   ख्वाबों   मे

उनकी   आँखों   में ,  उनकी  बाहों   में

बस   अब   मुझे   खो    जाने  दे,

ए जिन्दगी थम जा जरा..

मेरे सोए हुए अरमा को फिर से जाग जाने दे

जो देखे थे सपने उनके लिए सच हो जाने दे

बस अब प्यार की राहों में हमें खो जाने दे

ए जिन्दगी थम जा जरा मेरी उनसे मुलाकात हो गई।

                                       ~ ANKIT VERMA

उड़नछू(१)….

यादों के गुलदस्ते मे,
मोहब्बत की तस्वीर बन गई,

वो इस.कदर हमसे बिछड़े,

कि पत्थर की लकीर बन गई,

पहले तो रूहों को भी एहसास था उनके होने का,

अब तो सिर्फ तन्हाइयाँ ही रह गई,

सोचा था कि हम मोहब्बत का मिसाल बना देंगे, 

पर अब तो दिल ही मशाल बन गई,

उनकी यादों की मशाल मे जलकर,

अब तो बस कंगाल ही रह गई,

सोचा था कि ऊँचा उड़ेंगे मोहब्बत की दुनिया में,

पर पंख इस कदर तोड़ा उन्होंने,

कि उड़ने की आश ही मिट गई।

                                  ~ ANKIT VERMA

गुफ्तगूं (1)….

इबादते इश्क में ऐसे तड़पाया न कीजिए,
यूं आँखें मिलाकर हमसे शर्माया न कीजिए,

आँखें मिलती हैं तो उन्हें मिल जाने दीजिए,

दिल से दिल के तार को जुड़ जाने दीजिए,

क्या पता दोनों दिलों का पुराना नाता हो कोई,

इसलिए बेगम थोड़ा गुफ्तगूं तो हो जाने दीजिए।

                                   ~ANKIT VERMA

STRUGGLE….


If we see in real mean in world everyone is in struggle,I mean everybody has some problems in life, some target of life and everybody want to get rid with his problems or want to achieve his target at any  rate and everything that they do for that is what that is STRUGGLE.  

.      There’s many kind of struggle due to basis of needs of human or human life.

  • Struggle for money
  • Struggle for education
  • Struggle for poorness
  • Struggle for health

Actually we can’t define how many types of struggle in world but in direct we can say struggle is all which we do to get rid of our problems.OR we can say struggle is a path through which we get successed or our aim of life.

“we can say everything which we do in our life is struggle don’t matter what why and how to we do that.”