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TRUE HAPPINESS…

Happiness, what is this? You know what, it’s nothing but a kind of feeling which comes through two manners.

  • By doing well
  • Being something well

Former is great one means it remains long time with us but latter one finished with the passes of time. You know why one for long time and other for a short time it’s because when we do well then our soul becomes happy and calm that is true happiness so it’s for long time and in other condition we becomes happy nor our soul I mean that kind of happiness is only show that I am happy but actually we aren’t because our soul isn’t happy so it finished with the passes of time.

So, anything which we do and it makes our soul happy is called true happiness .


So we have to do something not for only become happy but for remain in condition of happiness for a long time and it’s possible only by doing well.
SO DO WELL AND BE WELL AND FEEL TRUE HAPPINESS.

                                    ~ANKIT VERMA

फिर इक दफा…..

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा,

मुझे कुछ कुछ हुआ फिर इक दफा,

उनकी झिलमिल सी आखें,

उन आखों के इशारे,

 उनकी प्यारी सी बातें, याद आ गई

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा।

वो आँखों का मिलना,

फिर होठों का हिलना,

वो हल्की सी मुस्कान याद आ गई,

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा।

वो झिलमिल सी रातें,

रातों में मुलाकातें,

मुलाकातों में कुछ प्यारी सी बातें,

उन बातों के यादें,

यादों की बरसाते सब याद आ गई,

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा,

मुझे कुछ कुछ हुआ फिर इक दफा।।

पहले प्यार को हम चाह कर भी नहीं भुला सकते है,उसकी यादें और भी ताजे हो जाते हैं, अगर हम उससे कहीं अचानक से ही मिल जाए।
                                              ~ANKIT VERMA

ये इश्क कमीनी होती है…..

जब अनजानीसी दो आखें यूं आपस मे मिल जाती हैं,
तब दिल में कुछ-कुछ होता है,

एहसास ये प्यारा होता है,

तन मन को यूं सुकूं सा मिलता है,

जैसे जन्नत मे खुदा से मिलता है,

अब इश्क यही से होती है,

ये बड़ी कमीनी होती है,

अब ये दिलों जा पे छा जाती है,

बस याद उसी की आती है,

मिलने को तड़पाती है,

रातों रात जगाती है,

अब सब कुछ फीकी पड़ जाती है,

यार तभी तो बोला मै ये इश्क कमीनी होती है,

जब होती है ना बस होती है,

अब निगाहें उन्हीं को ढूढती हैं,

मन बात उन्हीं से करने को कहता है,

सपने भी उन्हीं की होती है,

यादें भी उन्हीं की होती है,

अब सब चीज उन्हीं का होता है,

तभी तो बोल रहा हूं ना,

ये साली इश्क बड़ी ही कमीनी होती है, 

कुछ दिनों बाद जब दोनों मिलते हैं,

दोनों तन्हा से होते हैं,

बातें तो करना चाहते हैं,

पर मुँह से कुछ न कह पाते हैं,

फिर अलग वे हो जाते हैं,

बाद मे वे पछताते हैं,

अब सोच यही वो बनाते हैं,

कल बोल जरूर हम उनसे देंगें,

दिल खोल के हम अपना रख देंगे,

पर मिलने पर फिर वही होता है,

न बोल कोई फिर पाता है,

तभी तो बार बार बोल रहा हूँ न यार,

ये जो इश्क है न बड़ी कमीनी होती है,

अब दोनों फिर तड़पते हैं,

रातों को देर तक जगते हैं,

ये शिलशिला यूं ही बढता है,

दिल में इक दर्द सा रहता है,

कुछ समय जब बीतता है,

तब दर्द सहा नहीं जाता है,

अब बात जरूरी होता है

इकरार जरूरी होता है,

लेकिन इक डर सा लगता है,

जब मुलाकात फिर होती है,

दिल की धड़कन बढ जाती है,

इजहार भी अब हो जाती है,

धड़कन और भी अब बढ जाती है,

अब इश्क यही तो होता है,

पर यार फिर बोल रहा हूँ,

ये जो इश्क है न बड़ी कमीनी होती है,

जब होती है न बस होती है।

                                             ~Ankit Verma

LOVE..

  

It is link by which we contacted to each other. It is a link by which we can understand to other without talking and without telling any things. It is a connection which once connected then we do all work for a particular person which we never thought that we do so for any person and we do it simply.

             Its a think that make something must to do in our life for the particular person as I have to talk with, I have to see him/her, I have to make him/her laugh or other many actions and we get a special joy after do so. It is a kind of feeling which gives us both joy and sadness, we get joy when see him/her and get sadness when theres a distance between us.

                                             ~ANKIT VERMA

बस इक ख्वाहिश…..

वो थी जिन्दगी मे तो शायरी भी थी,आशिकी भी थी।
कहीं गुम सी हो गई वो तो शायरी भी नहीं,आशिकी भी नहीं।

शायरी भी उनकी थी,आशिकी भी उनकी थी।

वो लफ्ज़ भी उनकी थी,वो बातें भी उनकी थीं।

दिल सुनता भी उन्हीं को था,

दिल समझता भी उन्हीं को था,

ना जाने कैसे ये दूरी बन गई,

ना जाने क्यों वो हमसे दूर गई,

ना जाने क्या हुआ है. आजकल,

रोने को अश्क ही नहीं,

बोलने को लफ्ज़ ही नहीं,

मन समझता नहीं दिल सम्भलता नहीं,

ये क्या हो रहा है ये क्यों हो रहा है,

है कैसी ये बेबसी अपनी,

सब खत्म सी हो गई अपनी,

इक ख्वाहिश ही अब बची दिल की

फिर मिलें हम फिर हसें हम,

फिर शायद वो शायरी आ जाये,

फिर शायद वो आशिकी आ जाये,

फिर शायद वो हँसी आ जाये, 

अब बस इसी इक ख्वाहिश के लिए,

जिन्दगी भी बची है बन्दगी भी बची है।

                                                      ~ ANKIT VERMA

सफर…

सफर है ये जिंदगी तू सफर कर,
ऐ आशिक इश्क मे तू सफर कर,

पाना है जो तुम्हें मंजिल तो सफर कर,

कर लिया है जो इश्क तो तू सफर कर,

कभी तन्हाई का सफर,

कभी रूसवाई का सफर,

कभी यादों का सफर,

तो कभी ख्वाबों का.सफर,

सफर कर ए जिन्दगी तू सफर कर,

ए आशिक इश्क मे तू सफर कर,

वो चाहत की बातें,

वो प्यारी सी आखें,

वो झिलमिल सी रातें ,

उन रातों की मुलाकातें,

सब बातों का तू अब तो सफर कर,

सफर है ये जिंदगी तू सफर कर,

ए आशिक इश्क मे तू सफर कर,

आखें रोतीं हैं,

दिल मे दर्द सा हुआ है,

मेरी मेहबूबा आपकी यादों मे,

ये जिंदगी नर्क सा हुआ है।

                                                 ~ANKIT VERMA

SAFAR..

Safar hai ye jindagi tu suffer kr

Aai ashque isqe me tu suffer kr

Pana hai jo tumhe manjil to safar kr

Ker liya hai jo isqe tu to suffer kr

Kabhi tanhai ka suffer 

Kabhi rusvai ka suffer

Kabhi yado ka suffer 

To kabhi khvabo ka safar

Safer kr aai jindagi tu suffer kr

Aai ashque isqe me tu suffer kr

Vo chahat ki bate

Vo pyari si aankhe

Vo jhilmil si rate

Un raato ki mulakate 

Sab bato ka ty ab safar kr

Suffer hai ye jindagi tu safar kr 

Aai ashque isqe me tu safar kr

Aakhe roti hai 

Dil me dard sa huaa hai

Mere mehbuba aapki yado me

Ye jindai nark sa huaa hai

                                               ~ ANKIT VERMA