Home » Uncategorized » हमसफर…

हमसफर…

Start here

चले थे हम इक अनजाने सफर पर,

इक अनजाने नगर को, इक.अनजाने डगर पर,

चलते चलते हमें यूं कुछ ऐसा हुआ,

पाँव थम सी गई,नजर रूक सी गई,

दिल थम सा गया अब उन्हें देखकर,

वो परियों की रानी,

उनकी भोली सकल पर प्यारी सी नादानी,

उनकी बातों की मस्ती,

कुछ दिल को ऐसी थी लगती,

मैं बेहोश हो गया,

कसम से मैं बेहोश हो गया,

मैंने दिल दे दिया,

यारों मुझे इश्क हो गया,

अरे हाँ हाँ यारों मुझे इश्क हो गया।

अब जब मैं बढा अनजाने सफर पर,

मुझे ये क्या हुआ,

मुझे ऐसा लगा,

मुझे वो नगर मिल गया

मुझे वो डगर मिल गया

मुझे वो मिल गई, जिसकी थी मुझे तलाश,

मुझे मकसद मिली,

मुझे हमसफर मिल गई

अब कुछ मंजिल थी मेरी,

अब इक डगर थी मेरी, 

अब न अनजाने थे हम ,

न अनजाना था सफर,

जाना था कहीं दूर,

जहाँ सिर्फ मैं हूँ और मेरी हमसफर..

I LOVE YOU FOREVER……

                                  ~ANKIT VERMA

Advertisements

8 Comments

  1. "Sadhana" says:

    👉☝👌

    Liked by 1 person

  2. बहुत खूबसूरत रचना है आपकी।

    Liked by 1 person

  3. Waah mere bhaii kmal likha h aapne.👌

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: