Start here

फिर इक दफा…..

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा,

मुझे कुछ कुछ हुआ फिर इक दफा,

उनकी झिलमिल सी आखें,

उन आखों के इशारे,

 उनकी प्यारी सी बातें, याद आ गई

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा।

वो आँखों का मिलना,

फिर होठों का हिलना,

वो हल्की सी मुस्कान याद आ गई,

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा।

वो झिलमिल सी रातें,

रातों में मुलाकातें,

मुलाकातों में कुछ प्यारी सी बातें,

उन बातों के यादें,

यादों की बरसाते सब याद आ गई,

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा,

मुझे कुछ कुछ हुआ फिर इक दफा।।

पहले प्यार को हम चाह कर भी नहीं भुला सकते है,उसकी यादें और भी ताजे हो जाते हैं, अगर हम उससे कहीं अचानक से ही मिल जाए।
                                              ~ANKIT VERMA

ये इश्क कमीनी होती है…..

जब अनजानीसी दो आखें यूं आपस मे मिल जाती हैं,
तब दिल में कुछ-कुछ होता है,

एहसास ये प्यारा होता है,

तन मन को यूं सुकूं सा मिलता है,

जैसे जन्नत मे खुदा से मिलता है,

अब इश्क यही से होती है,

ये बड़ी कमीनी होती है,

अब ये दिलों जा पे छा जाती है,

बस याद उसी की आती है,

मिलने को तड़पाती है,

रातों रात जगाती है,

अब सब कुछ फीकी पड़ जाती है,

यार तभी तो बोला मै ये इश्क कमीनी होती है,

जब होती है ना बस होती है,

अब निगाहें उन्हीं को ढूढती हैं,

मन बात उन्हीं से करने को कहता है,

सपने भी उन्हीं की होती है,

यादें भी उन्हीं की होती है,

अब सब चीज उन्हीं का होता है,

तभी तो बोल रहा हूं ना,

ये साली इश्क बड़ी ही कमीनी होती है, 

कुछ दिनों बाद जब दोनों मिलते हैं,

दोनों तन्हा से होते हैं,

बातें तो करना चाहते हैं,

पर मुँह से कुछ न कह पाते हैं,

फिर अलग वे हो जाते हैं,

बाद मे वे पछताते हैं,

अब सोच यही वो बनाते हैं,

कल बोल जरूर हम उनसे देंगें,

दिल खोल के हम अपना रख देंगे,

पर मिलने पर फिर वही होता है,

न बोल कोई फिर पाता है,

तभी तो बार बार बोल रहा हूँ न यार,

ये जो इश्क है न बड़ी कमीनी होती है,

अब दोनों फिर तड़पते हैं,

रातों को देर तक जगते हैं,

ये शिलशिला यूं ही बढता है,

दिल में इक दर्द सा रहता है,

कुछ समय जब बीतता है,

तब दर्द सहा नहीं जाता है,

अब बात जरूरी होता है

इकरार जरूरी होता है,

लेकिन इक डर सा लगता है,

जब मुलाकात फिर होती है,

दिल की धड़कन बढ जाती है,

इजहार भी अब हो जाती है,

धड़कन और भी अब बढ जाती है,

अब इश्क यही तो होता है,

पर यार फिर बोल रहा हूँ,

ये जो इश्क है न बड़ी कमीनी होती है,

जब होती है न बस होती है।

                                             ~Ankit Verma

LOVE..

  

It is link by which we contacted to each other. It is a link by which we can understand to other without talking and without telling any things. It is a connection which once connected then we do all work for a particular person which we never thought that we do so for any person and we do it simply.

             Its a think that make something must to do in our life for the particular person as I have to talk with, I have to see him/her, I have to make him/her laugh or other many actions and we get a special joy after do so. It is a kind of feeling which gives us both joy and sadness, we get joy when see him/her and get sadness when theres a distance between us.

                                             ~ANKIT VERMA

बस इक ख्वाहिश…..

वो थी जिन्दगी मे तो शायरी भी थी,आशिकी भी थी।
कहीं गुम सी हो गई वो तो शायरी भी नहीं,आशिकी भी नहीं।

शायरी भी उनकी थी,आशिकी भी उनकी थी।

वो लफ्ज़ भी उनकी थी,वो बातें भी उनकी थीं।

दिल सुनता भी उन्हीं को था,

दिल समझता भी उन्हीं को था,

ना जाने कैसे ये दूरी बन गई,

ना जाने क्यों वो हमसे दूर गई,

ना जाने क्या हुआ है. आजकल,

रोने को अश्क ही नहीं,

बोलने को लफ्ज़ ही नहीं,

मन समझता नहीं दिल सम्भलता नहीं,

ये क्या हो रहा है ये क्यों हो रहा है,

है कैसी ये बेबसी अपनी,

सब खत्म सी हो गई अपनी,

इक ख्वाहिश ही अब बची दिल की

फिर मिलें हम फिर हसें हम,

फिर शायद वो शायरी आ जाये,

फिर शायद वो आशिकी आ जाये,

फिर शायद वो हँसी आ जाये, 

अब बस इसी इक ख्वाहिश के लिए,

जिन्दगी भी बची है बन्दगी भी बची है।

                                                      ~ ANKIT VERMA

सफर…

सफर है ये जिंदगी तू सफर कर,
ऐ आशिक इश्क मे तू सफर कर,

पाना है जो तुम्हें मंजिल तो सफर कर,

कर लिया है जो इश्क तो तू सफर कर,

कभी तन्हाई का सफर,

कभी रूसवाई का सफर,

कभी यादों का सफर,

तो कभी ख्वाबों का.सफर,

सफर कर ए जिन्दगी तू सफर कर,

ए आशिक इश्क मे तू सफर कर,

वो चाहत की बातें,

वो प्यारी सी आखें,

वो झिलमिल सी रातें ,

उन रातों की मुलाकातें,

सब बातों का तू अब तो सफर कर,

सफर है ये जिंदगी तू सफर कर,

ए आशिक इश्क मे तू सफर कर,

आखें रोतीं हैं,

दिल मे दर्द सा हुआ है,

मेरी मेहबूबा आपकी यादों मे,

ये जिंदगी नर्क सा हुआ है।

                                                 ~ANKIT VERMA

SAFAR..

Safar hai ye jindagi tu suffer kr

Aai ashque isqe me tu suffer kr

Pana hai jo tumhe manjil to safar kr

Ker liya hai jo isqe tu to suffer kr

Kabhi tanhai ka suffer 

Kabhi rusvai ka suffer

Kabhi yado ka suffer 

To kabhi khvabo ka safar

Safer kr aai jindagi tu suffer kr

Aai ashque isqe me tu suffer kr

Vo chahat ki bate

Vo pyari si aankhe

Vo jhilmil si rate

Un raato ki mulakate 

Sab bato ka ty ab safar kr

Suffer hai ye jindagi tu safar kr 

Aai ashque isqe me tu safar kr

Aakhe roti hai 

Dil me dard sa huaa hai

Mere mehbuba aapki yado me

Ye jindai nark sa huaa hai

                                               ~ ANKIT VERMA

YE ISQE KAMINI HOTI HAI…

Jab anjani si do ankhe yu aaps me mil jati hai

tab dil me kuch kuch hota hai

eahsas ye pyara hota hai

tan mann ko yu suku sa milta hai 

jaise jannat me khuda se milta hai

ab isqe yhi se hoti hai

ye bdi kamini hoti hai

ab ye dilo jan pe ksha jati hai

bs yad ushi ki aati hai

milne ko tadpati hai

rato rat jagati hai

ab sb kuch fiki pad jati hai

yr tabhi to bola mai ye isqe kamini hoti hai

jab hoti hai n bs hoti hai

ab nigahe unhi ko dhudti hai

mann bate unse kerne ko kahti hai

sapne bhi unhi ki hoti hai

yade bhi unhi ki hoti hai

ab sb chij unhi ki hoti hai

tabhi to bol rha hu na 

ye sali isqe badi hi kamini hoti hai

Kuch dino bad jab dono milte hai

Dono tanha se hote hai

Bate to karna chahte hai

Per muh se kuch na kah pate hai

Phir alag ve ho jate hai

Bad me ve pachtate hai

Ab soch yahi vo banate hai

Kal bole jarur hm unse denge

Dil khol ke hm apna rakh denge

Per milne par phir vhi hota hai

Na bole koi phir pata hai

Tabhi to bar bar bole rha hu n yaar

Ye jo isqe hai na badi kamini hoti hai

Ab dono phir tadapte hai

Rato ko der tk jagte hai

Ye silsila yu hi badta hai

Dil me ek dard sa rhta hai

Kuch samay jab bitate hai

Tb dard sha ni jata hai 

Ab baat jaruri hoti hai

Iqrar jaruri hoti hai

Lekin ek dar sa lagta hai

Jab mulakat phir hoti hai

Dil ki dhadkan badh jati hai

Ijhar bhi ab ho jati hai

Dhadkan aur bhi badh jati hai

Ab isqe yahi to hati hai

Par yr phir bol rha hu

Ye badi kamini hoti hai

Jab hoti hai na bas hoti hai..

                                                ~ANKIT VERMA