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फिर इक दफा…..

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मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा,

मुझे कुछ कुछ हुआ फिर इक दफा,

उनकी झिलमिल सी आखें,

उन आखों के इशारे,

 उनकी प्यारी सी बातें, याद आ गई

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा।

वो आँखों का मिलना,

फिर होठों का हिलना,

वो हल्की सी मुस्कान याद आ गई,

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा।

वो झिलमिल सी रातें,

रातों में मुलाकातें,

मुलाकातों में कुछ प्यारी सी बातें,

उन बातों के यादें,

यादों की बरसाते सब याद आ गई,

मैंने देखा उन्हें फिर इक दफा,

मुझे कुछ कुछ हुआ फिर इक दफा।।

पहले प्यार को हम चाह कर भी नहीं भुला सकते है,उसकी यादें और भी ताजे हो जाते हैं, अगर हम उससे कहीं अचानक से ही मिल जाए।
                                              ~ANKIT VERMA

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14 Comments

  1. Madhusudan says:

    Badhiya…bahut badhiya….

    Liked by 1 person

  2. Bahut hi sundar.
    Aakhir me jo likha aapne uss se bilkul sahamt hoon.

    Liked by 1 person

  3. बहुत ही खूबसूरत रचना है आपकी।

    Liked by 1 person

  4. pakhi says:

    Bahut hi sundar racha hai aap ankitji.👌👌👌

    Liked by 2 people

  5. Wah Bhai wah
    Bahut sundar likha hai aapne

    Liked by 2 people

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